Wednesday, January 30, 2019

प्रियंका गांधी के ‘नशे’ वाले वायरल वीडियो की हक़ीक़त

सोशल मीडिया पर कांग्रेस की नई महासचिव प्रियंका गांधी का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसके हवाले से लोग उनके शराब के नशे में धुत होने का दावा कर रहे हैं.

क़रीब 10 सेकेंड के इस वीडियो में प्रियंका गांधी मीडिया के लोगों पर भड़कती हुई दिखाई देती हैं.

कुछ लोगों ने इस वीडियो का सिर्फ़ 6 सेकेंड का वो हिस्सा शेयर किया है जिसमें प्रियंका गांधी को कहते सुना जाता है कि "अब आप चुपचाप खड़े होकर चलेंगे वहाँ तक."

सभी जगह पोस्ट किया गया ये वीडियो इतना धुँधला है कि इसे देखकर लगेगा कि प्रियंका गांधी की आँखों के नीचे काले गड्ढे पड़ गए हैं.

'आई एम विद योगी आदित्यनाथ', 'राजपूत सेना' और 'मोदी मिशन 2019' समेत कई बड़े फ़ेसबुक पन्नों और ग्रुप्स से ये वीडियो सैकड़ों बार शेयर किया गया है.

इन सभी ग्रुप्स में लोगों ने वीडियो शेयर करते हुए ये दावा किया है कि प्रियंका गांधी ने शराब के नशे में मीडिया के लोगों के साथ बदसलूकी की.

रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि ये वीडियो गुरुवार, 12 अप्रैल 2018 का है.

12 अप्रैल की शाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपने फ़ॉलोवर्स से कठुआ और उन्नाव रेप केस के ख़िलाफ़ दिल्ली के इंडिया गेट पर 'मिडनाइट प्रोटेस्ट' में शामिल होने की अपील की थी.

जनवरी 2018 में जम्मू के कठुआ ज़िले में बकरवाल समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप कर उसकी हत्या कर दी गई थी. वहीं इस घटना से कुछ दिन पहले बीजेपी नेता कुलदीप सिंह सेंगर पर उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप लगे थे. दोनों ही मामलों ने काफ़ी तूल पकड़ा थी और इन्हें लेकर देश भर में प्रदर्शन भी हुए थे.

इसी क्रम में दिल्ली में 12 अप्रैल को हुए विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी की छोटी बहन प्रियंका गांधी अपनी बेटी मिराया और पति रॉबर्ड वाड्रा के साथ शामिल हुई थीं. इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य नारा था- 'मोदी भगाओ, देश बचाओ'.

राहुल और प्रियंका, दोनों के इस प्रदर्शन में शामिल होने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अपने नेताओं के क़रीब पहुँचने की होड़ शुरू हो गई और ख़ुद प्रियंका गांधी को भी इंडिया गेट से सटे मुख्य प्रदर्शन स्थल तक पहुँचने में काफ़ी दिक्कत हुई.

कुछ रिपोर्टों के अनुसार प्रियंका गांधी अपने और अपनी बेटी मिराया के साथ हुई धक्का-मुक्की से नाराज़ हुई थीं.

उन्होंने मुख्य प्रदर्शन स्थल पर पहुँचकर पार्टी कार्यकर्ताओं और मीडियाकर्मियों से कहा था, "एक बार आप सोचिए कि आप क्या कर रहे हैं. अब आप चुपचाप खड़े होकर चलेंगे वहाँ तक. जिसे धक्का मारना है वो घर चले जाएं."

12-13 अप्रैल 2018 की तमाम रिपोर्ट्स के अनुसार ये कहना तो ठीक है कि प्रियंका गांधी मीडियाकर्मियों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर गुस्साई थीं, लेकिन किसी भी रिपोर्ट में उनके 'शराब के नशे में होने' की बात नहीं मिलती.

प्रियंका गांधी को औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी का महासचिव बनाए जाने के बाद से ही उनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की सामग्री दक्षिणपंथी झुकाव वाले ग्रुप्स में तेज़ी से शेयर की जा रही है.

कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रियंका गांधी का ये पुराना वीडियो बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी की विवादित टिप्पणी से जोड़ते हुए भी पोस्ट किया है.

राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा था, "प्रियंका गांधी को बायपोलर बीमारी है. वो काफ़ी हिंसक व्यवहार करती हैं. इसलिए उन्हें सार्वजनिक जीवन में काम नहीं करना चाहिए."

Tuesday, January 22, 2019

क्या अब दुनिया को बचाएगा शाकाहारी खाना?

दुनिया की आबादी फिलहाल लगभग 7.7 अरब है जो कि साल 2050 तक 10 अरब हो सकती है.

ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक डाइट प्लान बनाया है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना इतनी बड़ी आबादी के लिए भोजन की आपूर्ति की जा सके. इसे प्लेनेटरी हेल्थ डाइट कहा गया है.

इस डाइट प्लान में मांस और डेयरी उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. हालांकि, ये सुझाव दिया गया है कि लोगों को प्रोटीन की आपूर्ति के लिए फलियों और दालों की ओर बढ़ना चाहिए.

इस प्लान के तहत आपको अपने रोज़ाना के खानपान में से उन ज़्यादातर चीज़ों को निकालना होगा जिन्हें आप अक्सर खाते हैं. और उन चीज़ों को शामिल करना होगा जिन्हें कम खाते हैं

अगर आप हर रोज़ मांस खाते हैं तो कम करने वाली सबसे बड़ी चीज़ तो यही है.

अगर आप रेड मीट खाते हैं तो हफ़्ते में एक बर्गर और अगर जानवरों की आंतों से बनी डिश खाते हैं तो महीने में सिर्फ एक बार आपको ऐसी चीज़ें खानी चाहिए.

हालांकि, आप मछली से बने कुछ खाने का लुत्फ हफ़्ते में कई बार ले सकते हैं और हफ़्ते में एक बार ही चिकन खा सकते हैं. लेकिन इसके अलावा आपको प्रोटीन की आपूर्ति सब्जियों से करनी पड़ेगी.

शोधकर्ता दालें और फलियां खाने की सलाह देते हैं. हालांकि, स्टार्च वाली यानी कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति करने वाली सब्जियां जैसे आलू और अरबी की कटौती करनी होगी.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर वॉल्टर विलेट भी इस मुद्दे पर किए गए शोध में शामिल रहे हैं.

खेतों के बीच अपना बचपन बिताने वाले प्रोफेसर विलेट कहते हैं कि वह दिन में तीन बार रेड मीट खाते थे लेकिन अब उनके खाने पीने की शैली प्लेनेटरी हेल्थ डाइट के मुताबिक़ ही रही है.

विलेट अपनी इस बात को उदाहरण देकर समझाते हैं, "वहां पर खाने की चीज़ों की तमाम किस्में होती थीं. आप इन चीज़ों को अलग अलग तरह से मिलाकर कई डिश तैयार कर सकते हैं."

क्या ये डाइट प्लान एक कल्पना है?

इस योजना के तहत दुनिया के हर हिस्से में लोगों को अपने खानपान की शैली को बदलना चाहिए.

यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका को रेड मीट में भारी कटौती करने होगी. वहीं, पूर्वी एशिया को मछली खाने में कटौती करनी होगी. अगर अफ़्रीका की बात करें तो वहां पर लोगों को स्टार्च वाली सब्जियों को खाने में कटौती करनी होगी.

स्टॉकहोम युनिवर्सिटी में स्टॉकहॉम रेज़िलेंस सेंटर की निदेशक लाइन गॉर्डन कहती हैं, "मानवता ने कभी भी अपने खानपान को इस स्तर और इस गति से बदलने की कोशिश नहीं की है. अब रही बात इसके काल्पनिक होने या न होने की, तो कल्पनाओं को नकारात्मक होने की ज़रूरत तो नहीं है. अब वो समय आ गया है जब हम एक अच्छी दुनिया बनाने की सपना देखें."

ईट-लांसेट आयोग की इस परियोजना में दुनियाभर के 37 वैज्ञानिक शामिल हैं जिनमें एग्रीकल्चर साइंटिस्ट से लेकर क्लाइमेट चेंज और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर शोध करने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं.

इन लोगों ने दो सालों तक इस विषय पर शोध करने के बाद ये डाइट प्लान जारी किया है जो कि लांसेट नामक शोध जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

10 अरब लोगों के लिए खाने की ज़रूरत
साल 2011 तक दुनिया की आबादी सात अरब तक थी जो कि फिलहाल 7.7 अरब तक पहुंच गई है.

लेकिन साल 2050 तक ये आंकड़ा बढ़ कर 10 बिलियन तक पहुंच जाएगा.

शोधकर्ताओं के मुताबिक़, इस डाइट प्लान से हर साल 1.1 करोड़ लोगों को मरने से बचाया जा सकेगा.

दरअसल, इन लोगों को खराब खानपान की वजह से होने वाली बीमारियों जैसे हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक्स और कैंसर से बचाया जा सकेगा.

दुनिया के विकसित देशों में ये बीमारियों लोगों की असमय मृत्यु की सबसे बड़ी वजहों से एक है.

Thursday, January 10, 2019

राहुल गांधी मोदी से और लोग राहुल से बोले- BeAMan

राहुल ने कहा था, ''56 इंच की छाती वाला प्रधानमंत्री लोकसभा में एक मिनट के लिए नहीं आ पाया. ढाई घंटे निर्मला सीतारमण जी ने भाषण दिया. हमने भाषण की धज्जियां उड़ाईं. वो जवाब नहीं दे पाईं. लोकसभा में रफ़ाल पर बहस हो रही थी, मोदी पंजाब भाग गए. चौकीदार रफ़ाल पर एक मिनट भी नहीं बोल पाए... चौकीदार लोकसभा में पैर नहीं रख पाया. और एक महिला से कहता है कि निर्मला सीतारमण जी आप मेरी रक्षा कीजिए, मैं अपनी रक्षा नहीं कर पाऊंगा. आपने देखा कि ढाई घंटे महिला रक्षा नहीं कर पाई.''

राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर कहा, ''हमारी सभ्यता में महिलाओं का सम्मान घर से शुरू होता है. डरना बंद कीजिए. मर्दों की तरह बात कीजिए. और मेरे सवाल का जवाब दीजिए. क्या वायुसेना और रक्षा मंत्रालय ने असली रफ़ाल डील को ख़त्म किए जाने का विरोध किया था?''

राहुल गांधी के इस बयान की पीएम नरेंद्र मोदी ने आलोचना की. मोदी ने कहा, ''अब विपक्ष एक महिला का अपमान करने पर उतारू हो गया है. यह देश की महिलाओं का अपमान है."

राहुल गांधी ने पीएम मोदी से 'मर्द बनिए' यानी Be A Man कहा था.

ये Be A Man की ट्विटर पर टॉप ट्रेंड है. बीजेपी से जुड़े लोग और आम लोग इस हैशैटग के साथ ट्वीट कर रहे हैं.

बीजेपी आइटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, ''राहुल गांधी का देश की रक्षा मंत्री के लिए ऐसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल हैरान करने वाला है. वो भी इसलिए क्योंकि वो महिला हैं. असली मर्द औरतों का अपमान नहीं करते हैं.

संचिता गजपति ने ट्वीट किया, ''रक्षा मंत्री निर्मला पर राहुल गांधी का बयान शर्मनाक है. ये हर भारतीय महिला का अपमान है. असली मर्द महिला का सम्मान करता है.''

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा लिखती हैं, ''राहुल गांधी इस बयान से क्या साबित करना चाहते हैं. क्या वो ये सोचते हैं कि महिलाएं कमज़ोर हैं?''

शीतल मिश्रा लिखती हैं, ''पीएम मोदी ने डर की वजह से संयुक्त राष्ट्र में सुषमा स्वराज को भेजा होगा? क्यों राहुल गांधी जी?''

खुद को मोदी समर्थक बताने वाली रिद्धिमा त्रिपाठी लिखती हैं, ''ये आदमी जो एक औरत की इज्जत नहीं कर सकता. वो हमारे भारत को चलाना चाहता है. कमाल है.''

इस ट्वीट किए वीडियो में मोदी ये कहते नज़र आते हैं, ''भाइयों बहनों, क्या देश में कभी किसी ने 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड देखी है. 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड इस ग़रीब देश में.''

पहले कब-कब नेताओं के बिगड़े बोल?
राहुल गांधी का किसी महिला को लेकर दिया बयान पहला वाकया नहीं है.

इससे पहले कई ऐसे मौक़े रहे हैं, जिसमें नेताओं ने महिलाओं को लेकर बयान दिए हैं. इन बयानों को लेकर काफी आपत्तियां जताई गईं और विवाद भी हुआ.

दिसंबर 2018:विधानसभा चुनावों के लिए पीएम नरेंद्र मोदी प्रचार कर रहे थे.

मोदी ने तब कहा था, ''कांग्रेस की नींद क्यों हराम हो गई है. कांग्रेस की सरकार में जो बेटी पैदा नहीं हुई, वो विधवा भी हो गई और पेंशन भी मिल गई. ये रुपये कौन विधवा थी जो लेती थी. ये कांग्रेस की कौन सी विधवा थी, जिसके खाते में रुपया जाता था.''

फरवरी 2018:पीएम मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोल रहे थे. इस दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगीं. तब सभापति वेंकैया नायडू ने रेणुका को चुप रहने के लिए कहा.

तब पीएम मोदी ने कहा था, ''सभापति जी, मेरी आपसे विनती है कि रेणुका जी को कुछ मत कहिए. रामायण सीरियल के बाद ऐसी हँसी सुनने का सौभाग्य आज मिल पाया है.''

अक्तूबर 2012:एक चुनावी रैली में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनंदा पुष्कर को लेकर एक बयान दिया था.

मोदी ने कहा था, ''भाइयों बहनों बता दीजिए. इस देश में कभी किसी ने 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड देखी है. इस ग़रीब देश में. और उस समय इतना माहौल ख़राब हो गया कि उनसे इस्तीफ़ा ले लिया गया. अभी भी वो ऐसे मामले में लटके हुए हैं. कल भी उनको मंत्री बनाकर बाइज्ज़त बरी कर दिया गया. कांग्रेस का कल्चर देखिए.''

Friday, January 4, 2019

रफ़ाल सौदा: 'राहुल गांधी की आक्रामकता तो ठीक है, पर नए तथ्यों का अभाव है'-नज़रिया

जब से राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली है, उनके पास संसद में स्वयं पर गर्व करने के उचित कारण हैं. क्योंकि उनके नेतृत्व में हाल में विधानसभा चुनाव में हिन्दी भाषी राज्यों में बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा है.

इस जीत से उनके उस आत्मविश्वास में इज़ाफ़ा हुआ है, जिससे वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा में सत्ता से हटा सकें और कांग्रेस को सत्ता के करीब ला सकें.

इस आत्मविश्वास ने राहुल में एक नए प्रकार की आक्रामकता को भी जन्म दिया है.

वो जानते हैं (और हर किसी को साबित किया है) कि उन्हें "पप्पू" कहकर हल्के में नहीं लिया जा सकता.

अब वो वर्तमान सरकार से लोहा लेने के लिए विपक्ष की अगुवाई करने वालों में सबसे पसंदीदा नेता बन गए हैं.

राहुल की रणनीति में कुछ भी ग़लत नहीं, सिवाय इसके कि जैसा कुछ लोगों का मानना है कि मोदी पर निशाना साधने में वो अक्सर निन्दनीय अभियान चलाते हैं, बजाय सच्चाई को तथ्यों के साथ बखान करने के.

आप जन सभाओं में बड़ी-बड़ी बातें और मिथ्यारोपण कर सकते हैं. लेकिन अगर आपको लम्बे समय तक गंभीरता के साथ नेतृत्व करना है, तो आपको सदन पटल पर अपने विरोधियों को मात देने की विधा आनी चाहिए.

दुर्भाग्यवश, राहुल इस अवसर का इस्तेमाल नहीं कर पाए.

राफ़ाल सौदे पर मोदी के ख़िलाफ़ बिना कोई नया तथ्य प्रस्तुत किये, राहुल संसद पटल का इस्तेमाल उन्हें सिर्फ़ भ्रष्ट, घृणित, तानाशाह साबित करने और नीचा दिखाने की कोशिश करने के लिए कर रहे हैं.

यहां तक कि गोवा के एक मंत्री का ऑडियो टेप सुनाने की उनकी कोशिश भी एक निम्न स्तरीय सबूत बनकर रह गई, जिसमें दावा किया गया था कि रफ़ाल सौदे पर मोदी को मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ब्लैकमेल कर रहे हैं. (जब लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उनसे टेप की विश्वसनीयता साबित करने के लिए कहा तो वो बैठ गए.)

राहुल का ये रवैया उनके प्रशंसकों को उत्साहित कर सकता है या मीडिया में वैसी ही बड़ी सुर्खी बन सकता है, जैसा पिछले साल जुलाई में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहस के बाद मोदी को आलिंगन करना और फिर आंख मारकर बदनामी मोल लेना.

लेकिन भारत का प्रधानमंत्री बनने की चाहत रखने वाले एक नेता के लिए ये अच्छी बात नहीं है. राहुल संसदीय नियमों को ताक पर नहीं रख सकते, अगर वो चाहते हैं कि संसदीय इतिहास में वो अपनी छाप छोड़ें, जैसा उनकी दादी इन्दिरा गांधी और परनाना जवाहर लाल नेहरू ने किया.

सरकार को ओछा दिखाने के लिए कोई भी छोटा रास्ता अख्तियार करना राहुल या कांग्रेस की मदद नहीं करेगा, अगर वो इस बात के पुख्ता सबूत पेश नहीं करते कि मोदी या उनकी सरकार ने वित्तीय लाभ के लिए ये कदम उठाया था.

राहुल के सामने बड़ी समस्या ये है कि भारतीय वायु सेना को रफ़ाल लड़ाकू विमानों के दो स्क्वॉड्रन उपलब्ध कराने और इसकी फ्लीट को पूरी तरह आधुनिक बनाने के मोदी सरकार के कदम में सुप्रीम कोर्ट को कोई दोष नज़र नहीं आया.

ये मानना बेहद मुश्किल है कि राहुल के पास कुछ नया हथियार है, जब तक वो कोई नया तथ्य या सबूत पेश नहीं करते.

अब तक राहुल गांधी ने रफ़ाल मुद्दे पर सिर्फ़ व्याख्यान का सहारा लिया है, जिसमें प्रधानमंत्री को घृणित अभियान चलाने वाला 'चोर' कहा है. इस भाषा ने संसद की गरिमा की तमाम परम्पराओं को तोड़ दिया है.

हालांकि अगर उनके व्याख्यान में पुख्ता तथ्यों का समावेश होता तो शायद ये बात अधिक नहीं चुभती.

हाल ही में हमने देखा कि राहुल लगातार रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री, दसौ के सीईओ और यहां तक कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों को झूठा बताते रहे.

उन्होंने यहां तक कि वायु सेना प्रमुख को भी झूठा बताने के लिए कांग्रेस को उत्प्रेरित किया, और रफ़ाल पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की भी आलोचना की, क्योंकि ये उनके मनमुताबिक नहीं था. संक्षेप में कहा जाए तो ऐसा लगा कि कांग्रेस अध्यक्ष के सिवाय रफ़ाल मुद्दे पर हर कोई झूठ बोल रहा था.